india24x2todaynews।।डोल ग्यारस के अवसर पर ढोल-नगाड़ों की गूँज और उत्साह के साथ ग्रामवासियों ने जुलूस निकाला ग्राम संडावदा ।जिसमें भगवान की प्रतिमा को डोल पालकी में विराजित करके नगर में भ्रमण कराया गया और पूजा-अर्चना की गई. यह उत्सव उज्जैन तहसील खाचरोद ग्राम संडावदा सहित कई राज्यों में मनाया जाता है और इसे परिवर्तिनी एकादशी व जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. डोल ग्यारस पर जुलूस निकालने की परंपराभगवान का स्वरूप:

भगवान कृष्ण को एक सुंदर डोल या पालकी में बैठाकर नगर भ्रमण कराया जाता है. पूजन विधि जुलूस के दौरान, जगह-जगह पर ग्रामीणों द्वारा डोल की पूजा-अर्चना की जाती है. नदियों के पास ले जाना:भगवान को पालकी में बैठाकर नदियों या तालाबों के पास ले जाकर स्नान भी कराया जाता है. डोल ग्यारस का महत्और कथापौराणिक कथा एक कथा के अनुसार, माता देवकी ने कंस से अपने पुत्र भगवान कृष्ण को बचाने के लिए एक व्रत रखा था, जिसे कल्याणी एकादशी के नाम से जाना जाता था जलवा पूजन:श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद अठारहवें दिन माता यशोदा ने उनका जल पूजन (घट पूजन) किया था, और इसी दिन को ‘डोल ग्यारस’ या जलझूलनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है.
