February 5, 2026
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india24x7todaynews।। संपादक राजु गुप्ता।।मध्यप्रदेश शासन द्वारा पीड़ीतो को न्याय दिलाने व शासकीय अधिकारियों को अपने कार्य के प्रति कर्त्तव्य के लिये जनसुनवाई जैसी महती योजना प्रारम्भ की थी लेकिन इस योजना का नागदा में स्थानीय अधिकारियों ने मखौल उड़ा दिया है। इस योजना को अधिकारियों ने मजाक बना दिया है। जिससे नाराज होकर शहर के युवा अभिभाषक व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को इस जनसुनवाई योजना को बंद करने की मांग की है। इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव म.प्र. शासन व कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन एसडीएम रंजना पाटीदार को दिया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि अनुविभागीय अधिकारी/एस.डी.एम. नागदा द्वारा तहसील परिसर नागदा मे प्रत्येक मंगलवार को शासन के निर्देशों पर आयोजित व संचालित होने वाले जनसुनवाई में नागरिकों की शिकायतों का कोई वास्तविक निवारण नहीं किया जा रहा है। नागरिकों द्वारा उठाए गए गंभीर जनहित एवं व्यक्तिगत मामलों पर केवल कागजी पत्र जारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है, परंतु उन पत्रों अथवा आदेशों का पालन अधीनस्थ अधिकारी करने को तैयार नहीं होते हैं। यह अत्यंत गंभीर जांच का विषय हैं कि पटवारी स्तर तक के कर्मचारी एसडीएम महोदय के निर्देशों का पालन करने में सामर्थ्य नहीं रखते हैं।

1. यह कि एसडीएम महोदया द्वारा जनसुनवाई में दी जाने वाली शिकायतों पर केवल पत्र जारी कर दिए जाते हैं, पर उन पर किसी प्रकार की ठोस कार्यवाही नहीं होती हैं।

2. यह कि एस.डी.एम. के आदेशों का पालन तहसील, नगरपालिका, राजस्व निरीक्षक, पटवारी एवं अन्य अधीनस्थ अधिकारी नहीं कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक अनुशासन पूरी तरह समाप्त हो गया है।

3. यह कि जनसुनवाई में उपस्थित अधिकारी नागरिकों की बात पूरी तरह सुनने के बजाय केवल कार्यवाही का दिखावा करते हैं। कई विभागों के कनिष्ठ श्रेणी के की पात्रता एवं अधिकार प्राप्त नहीं हैं। कर्मचारी जनसुनवाई में बैठा दिए जाते हैं जिन्हे किसी भी मामले में कार्यवाही की पात्रता व अधिकार प्राप्त नहीं है है

4. यह कि कई आवेदनों पर महीनों बीत जाने के बाद भी न तो कोई जांच होती है और न ही समाधान का कोई आदेश पारित किया जाता है। सिर्फ आम जनता को गुमराह करने का कार्य किया जा रहा हैं। इससे नागरिकों में असंतोष और अविश्वास की भावना अत्यधिक बढ़ गई है।

5. नागदा शहर मे अवैध खनन, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण, अवैध कॉलोनी निर्माण, नगरपालिका मे भ्रष्टाचार, अनियमितताए, शासकीय टेंडरों मे घोटाले सहित कई गंभीर मामले संज्ञान में आने के बावजूद एसडीएम नागदा द्वारा कोई ठोस एवं संतोषजनक कार्यवाही नहीं की जा रही हैं। इसकए विपरीत संरक्षण दिया जा रहा हैं।

ज्ञापन में यह भी बताया कि जनसुनवाई का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है, न कि केवल पत्र व्यवहार की औपचारिकता निभाना हैं। जनसुनवाई में दी जाने वाली शिकायतों पर सिर्फ पत्र जारी कर दिए जाते हैं, परंतु उन पर कोई वास्तविक कार्यवाही नहीं होती हैं। यहां तक कि कई गंभीर जनहित व व्यक्तिगत प्रकरण महीनों से लंबित हैं, पर समाधान के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई चल रही है। जनसुनवाई अब जनता के लिए राहत का माध्यम न होकर औपचारिकता का मंच बन चुकी है। शहर मे अवैध रूप से हो रहे अतिक्रमणों, अवैध खनन, अवैध निर्माणों, शासकीय टेंडरों एवं आम जनहित से जुड़ी सुविधाओ के नाम पर धनबल माफियाओ को खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा हैं।

यह उठाई मांग-

एस.डी.एम. नागदा की जनसुनवाई तत्काल प्रभाव से स्थगित (बंद) करने एवं एक स्वतंत्र जांच समिति गठित कराई जाए जो बीते 6 माह की सभी जनसुनवाईयों के रिकॉर्ड, जारी पत्रों एवं आदेशों की स्थिति की जांच करे। साथ ही जिन अधिकारियों ने एस.डी.एम. के आदेशों का पालन नहीं किया है, उन पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जाए। भविष्य में जनसुनवाई केवल कलेक्टर कार्यालय या वरिष्ठ स्तर की निगरानी में सीसीटीनी मे सम्पूर्ण कार्यवाही की रिकॉर्डिंग कराई जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

ज्ञापन का वाचन अभिभाषक अभिषेक चौरसिया ने किया । इस मौके पर नागरिक अधिकार मंच जिला अध्यक्ष अभय चोपडा, अभिभाषक रविन्द्रसिंह रघुवंशी, कृतेश जैन आदि मौजूद रहे।

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